Wednesday, August 27, 2014

मेरी पहली हरितालिका

कथा यहाँ पर है
http://www.chhathpuja.co/community/viewdiscussion/2381-hartalika-teej-vrat-katha-in-hindi,-%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%9C-%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A4%A5%E0%A4%BE?groupid=12


कल हरितालिका तीज है जो मुख्यतः  उत्तर भारत में मनाई जाती है महाराष्ट्र और गुजरात में भी मनाई जाती है गुजरात में इसे" केवड़ा तीज" कहते है .बालू रेत से भगवान शंकर का लिंग बनाकर माँ पार्वती के साथ पूजा की जाती है कुवारी लड़कियो को अच्छे वर  मिले और सौभग्यवती स्त्रियों का सौभाग्य अखंड रहे इस मनोकामना से इस व्रत को निर्जल  रहकर किया जाता है अब भले ही इसका स्वरूप बदल गया हो और किसकी कितनी आस्था है वो विषय अलग है।
मुझे तो तो अपनी पहली हरितालिका याद आ रही है जिसे मैंने (मैंने क्या मुझे दिलवाई गई थी )आज से ५४ साल पहले शुरू की थी मात्र ६ साल की पूरी हुई थी और सातवा  साल आरम्भ हुआ ही था। गांव की अन्य महिलाओ और अपने से थोड़ी बड़ी बुआओं को देखकर बहुत शौक आया था और विधिवत दिलवाई गई हरितालिका तीज घर भर में बहुत लाड़ प्यार पहला व्रत  जो था, हम भी  बहुत बहुत उत्साही पानी भी नहीं पीना तो पुरे घर की सहानुभूति  मिल रही थी दिन भर ,शाम को पूजा के लिए सब तैयार घर में ही  रेत  के शिवलिंग बनाये गए ब्राम्हण का घर था ही छोटे दादाजी   पंडितजी थे ही सब महिलाये अपने अपने शालू पैठणी (शादी की बनारसी साड़ी ) पहनकर पूजा के थाल  लेकर आने लगी माँ की पैठणी मुझे भी पहना दी गई थी इतना याद है पूजा शुरू हुई मेरी आँखों के सामने अँधेरा सा छाने लगा था सब की पूजा हुई आरती कैसे हुई न मालूम, मैं  सीधी पहुंच गई पनिहारे (  जहाँ मटकाआदि रखे जाते है )के पास और एक गिलास पानी पिया पैठणी अधि खुल चुकी थी दादी ढूंढते ढूढ़ते आई तब तक बेहोश कहे या नींद जो लगी तो दूसरे दिन सुबह ही जाग  हुई सब लोग कहने लगे  रबड़ी   बनी   थी तुझे कितना    जगाया तू तो उठी ही नहीं तेरे  हिस्से की ही हम सबने मिलकर खा ली।  जिस रबड़ी के लिए व्रत किया वो भी गई दूसरे दिन गणपति के लड्डू ज्यादा  मिले  रबड़ी की  ऐवज में  से अनवरत यह व्रत   चल रहा है कई जगह रहे  पूजा व्रत   स्थान के अनुसार चलते रहे है अब यहां बेंगलोर में गौरी पूजा    होती  है यहाँ उपवास व्रत का कोई फंडा नहीं है।







1 टिप्पणियाँ:

वन्दना अवस्थी दुबे said...

हाहाहा... खूब मजेदार शुरुआत रही आपकी तो...