Wednesday, February 27, 2013

जातक अपने शरीर पर तिल देखकर जाने कैसा होगा भविष्य

जातक अपने शरीर पर तिल देखकर जाने कैसा होगा भविष्य
तिल मात्र सौंदर्य बोधक ही नहीं होते हैं, ये व्यक्ति के भविष्य में घटित होने वाली घटनाओं का संकेत भी देते हैं। शरीर के विभिन्न अंगों पर तिल की स्थिति, उनके रंग और आकृति आदि के अध्ययन से जातक के भविष्य का अनुमान लगाया जा सकता है। पुरुष के शरीर पर दाहिनी ओर तिल होना शुभ एवं लाभकारी माना गया है जबकि महिलाओं के बायीं तरफ वाले तिल शुभ एवं लाभकारी माना जाता हैं। यदि किसी के हृदय पर तिल हो तो वह सौभाग्यवती होती है। किसी भी व्यक्तिके शरीर पर बारह से ज्यादा तिल होना अच्छा नहीं माना जाता। बारह से कम तिलों का होना शुभ फलदायक है।

भले ही व्यक्ति के चेहरे का रंग गोरा अथवा सांवला हो। तिल चेहरे की सुंदरता में चार चांद लगा देते हैं। ऐसी मान्यता भी है कि व्यक्ति के चेहरे पर काले तिल उसे लोगों की बुरी नजर से बचाते हैं। इसलिए आजकल युवतियां अपने चेहरे को सुंदर बनाने के लिए कृतिम तिल भी बनवा लेती हैं। शरीर के विभिन्न अंगों पर पाए जाने वाले तिलों के बारे में हम आपको बताते हैं|

ललाट पर तिल- ललाट के मध्य भाग में तिल निर्मल प्रेम की निशानी है। ललाट के दाहिने तरफ का तिल किसी विषय विशेष में निपुणता, किंतु बायीं तरफ का तिल फिजूलखर्ची का प्रतीक होता है। ललाट या माथे के तिल के संबंध में एक मत यह भी है कि दायीं ओर का तिल धन वृद्धिकारक और बायीं तरफ का तिल घोर निराशापूर्ण जीवन का सूचक होता है।

भौंहों पर तिल - यदि दोनों भौहों पर तिल हो तो जातक अकसर यात्रा करता रहता है। दाहिनी पर तिल सुखमय और बायीं पर तिल दुखमय दांपत्य जीवन का संकेत देता है।

आंख की पुतली पर तिल - दायीं पुतली पर तिल हो तो व्यक्ति के विचार उच्च होते हैं। बायीं पुतली पर तिल वालों के विचार कुत्सित होते हैं। पुतली पर तिल वाले लोग सामान्यत: भावुक होते हैं।

पलकों पर तिल - आंख की पलकों पर तिल हो तो जातक संवेदनशील होता है। दायीं पलक पर तिल वाले बायीं वालों की अपेक्षा अधिक संवेदनशील होते हैं।

आंख पर तिल - दायीं आंख पर तिल स्त्री से मेल होने का एवं बायीं आंख पर तिल स्त्री से अनबन होने का आभास देता है।

कान पर तिल - कान पर तिल व्यक्ति के अल्पायु होने का संकेत देता है।

नाक पर तिल - नाक पर तिल हो तो व्यक्ति प्रतिभासंपन्न और सुखी होता है। महिलाओं की नाक पर तिल उनके सौभाग्यशाली होने का सूचक है।

होंठ पर तिल - होंठ पर तिल वाले व्यक्ति बहुत प्रेमी हृदय होते हैं। यदि तिल होंठ के नीचे हो तो गरीबी छाई रहती है।

मुंह पर तिल - मुखमंडल के आसपास का तिल स्त्री तथा पुरुष दोनों के सुखी संपन्न एवं सज्जन होने के सूचक होते हैं। मुंह पर तिल व्यक्ति को भाग्य का धनी बनाता है। उसका जीवनसाथी सज्जन होता है।

गाल पर तिल - गाल पर लाल तिल शुभ फल देता है। बाएं गाल पर कृष्ण वर्ण तिल व्यक्ति को निर्धन, किंतु दाएं गाल पर धनी बनाता है।

जबड़े पर तिल - जबड़े पर तिल हो तो स्वास्थ्य की अनुकूलता और प्रतिकूलता निरंतर बनी रहती है।

ठोड़ी पर तिल - जिस स्त्री की ठोड़ी पर तिल होता है, उसमें मिलनसारिता की कमी होती है।

कंधों पर तिल - दाएं कंधे पर तिल का होना दृढ़ता तथा बाएं कंधे पर तिल का होना तुनकमिजाजी का सूचक होता है।

दाहिनी भुजा पर तिल - ऐसे तिल वाला जातक प्रतिष्ठित व बुद्धिमान होता है। लोग उसका आदर करते हैं।

बायीं भुजा पर तिल - बायीं भुजा पर तिल हो तो व्यक्ति झगड़ालू होता है। उसका सर्वत्र निरादर होता है। उसकी बुद्धि कुत्सित होती है।

कोहनी पर तिल - कोहनी पर तिल का पाया जाना विद्वता का सूचक है।

हाथों पर तिल - जिसके हाथों पर तिल होते हैं वह चालाक होता है। गुरु क्षेत्र में तिल हो तो सन्मार्गी होता है। दायीं हथेली पर तिल हो तो बलवान और दायीं हथेली के पृष्ठ भाग में हो तो धनवान होता है। बायीं हथेली पर तिल हो तो जातक खर्चीला तथा बायीं हथेली के पृष्ठ भाग पर तिल हो तो कंजूस होता है।

अंगूठे पर तिल - अंगूठे पर तिल हो तो व्यक्ति कार्यकुशल, व्यवहार कुशल तथा न्यायप्रिय होता है।

तर्जनी पर तिल - जिसकी तर्जनी पर तिल हो, वह विद्यावान, गुणवान और धनवान किंतु शत्रुओं से पीड़ित होता है।

मध्यमा पर तिल - मध्यमा पर तिल उत्तम फलदायी होता है। व्यक्ति सुखी होता है। उसका जीवन शांतिपूर्ण होता है।

अनामिका पर तिल - जिसकी अनामिका पर तिल हो तो वह ज्ञानी, यशस्वी, धनी और पराक्रमी होता है।

कनिष्ठा पर तिल - कनिष्ठा पर तिल हो तो वह व्यक्ति संपत्तिवान होता है, किंतु उसका जीवन दुखमय होता है।

गले पर तिल - गले पर तिल वाला जातक आरामतलब होता है। गले पर सामने की ओर तिल हो तो जातक के घर मित्रों का जमावड़ा लगा रहता है। मित्र सच्चे होते हैं। गले के पृष्ठ भाग पर तिल होने पर जातक कर्मठ होता है।

छाती पर तिल - छाती पर दाहिनी ओर तिल का होना शुभ होता है। ऐसी स्त्री पूर्ण अनुरागिनी होती है। पुरुष भाग्यशाली होते हैं। शिथिलता छाई रहती है। छाती पर बायीं ओर तिल रहने से भार्या पक्ष की ओर से असहयोग की संभावना बनी रहती है। छाती के मध्य का तिल सुखी जीवन दर्शाता है। यदि किसी स्त्री के हृदय पर तिल हो तो वह सौभाग्यवती होती है।

कमर पर तिल - यदि किसी व्यक्ति की कमर पर तिल होता है तो उस व्यक्ति की जिंदगी सदा परेशानियों से घिरी रहती है।

पीठ पर तिल - पीठ पर तिल हो तो जातक भौतिकवादी, महत्वाकांक्षी एवं रोमांटिक हो सकता है। वह भ्रमणशील भी हो सकता है। ऐसे लोग धनोपार्जन भी खूब करते हैं और खर्च भी खुलकर करते हैं। वायु तत्व के होने के कारण ये धन संचय नहीं कर पाते।

पेट पर तिल - पेट पर तिल हो तो व्यक्ति चटोरा होता है। ऐसा व्यक्ति भोजन का शौकीन व मिष्ठान्न प्रेमी होता है। उसे दूसरों को खिलाने की इच्छा कम रहती है।

घुटनों पर तिल - दाहिने घुटने पर तिल होने से गृहस्थ जीवन सुखमय और बायें पर होने से दांपत्य जीवन दुखमय होता है।

पैरों पर तिल - पैरों पर तिल हो तो जीवन में भटकाव रहता है। ऐसा व्यक्ति यात्राओं का शौकीन होता है। दाएं पैर पर तिल हो तो यात्राएं सोद्देश्य और बाएं पर हो तो निरुद्देश्य होती हैं।

पुरुषों के शरीर पर तिल का प्रभाव-

जिस पुरुष के सिर (मस्तक) पर तिल होता है, वह हर जगह इज्जत पाता है वहीँ अगर आँख पर तिल होता है तो वह उच्च पद पाता है।
जिस पुरुष के मुख पर तिल होता है बहुत दौलत वाला होता है, वहीँ जिसके गाल पर तिल हो तो उसे स्त्री सुख मिलता है। हाथ के पंजे पर तिल हो तो वह व्यक्ति दिलदार व दयालु रहता है।
छाती की दाहिनी तरफ तिल हो तो अच्छी स्त्री मिलती है वहीँ अगर ऊपर के होंठ पर तिल हो तो धन की प्राप्ति होती है इसके साथ ही चारों तरफ इज्जत मिलती है।नीचे के होंठ पर तिल हो तो वह व्यक्ति कंजूस होता है।
दाहिने कंधे पर तिल हो तो वह व्यक्ति कलाकार होता है। क्षेत्र कोई-सा भी हो सकता। अगर गर्दन पर तिल हो तो उस व्यक्ति की लंबी उम्र होती है|
कान पर तिल हो तो वह खूब पैसे वाला होता है। पाँव पर तिल हो तो उस व्यक्ति के विदेश यात्रा का योग बनता है।

स्त्री के शरीर पर तिल का प्रभाव-

जिस महिला के गाल पर तिल होता है, उसे अच्छा पति मिलता है वहीँ जिस स्त्री के गाल के बाँईं तरफ तिल हो तो ऐशो-आराम का सुख मिलता है
महिला के बाईं तरफ मस्तक पर तिल हो तो वह किसी राजा की रानी बनती है वहीँ अगर मस्तक पर तिल हो तो हर जगह इज्जत मिलती है।
नाक पर तिल हो तो वह महिला रूपवान होती है, पर बहुत ही घमंडी होती है वहीँ कान पर तिल हो तो आभूषण पहनने का सुख मिलता है।
आपको बता दें की आँख पर तिल हो तो पति की बहुत अधिक प्रिय होती है। छाती पर तिल हो तो पुत्र की प्राप्ति होती हैपाँव पर तिल हो तो विदेश यात्रा का योग रहता है
जाँघ पर तिल हो तो नौकर-चाकर का सुख मिलता है।
 
अधिक   विषयों की जानकारी के लिए निम्न लिंक पर जा सकते है । http://hchourey.blogspot.in/
 


आचार्य विजय कुमार [शनि उपासक,प्रचारक]

Friday, February 15, 2013

 बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाये ।

बसंत










शीत की बंद कोठरी के द्वार से
अंधेरो को उजाले में लाया है बसंत ।

महकती कलियों के लिए भोरो का ,
प्रेम संदेश लाया है बसंत .

पीले से मुख पर बसंती आभा
बिखेरता हुआ आया है बसंत .

किसानो के लिए फसलो की सोगात
लेकर आया है बसंत .

जीवन को जीवन देने ,
फ़िर से आया है बसंत .

और पढ़ते हुए बच्चो के लिए ,
देवी माँ सरस्वती का वरदान
लेकर आया है बसंत ।

एक कविता 




" भोजन मंत्र "

ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्।
ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना॥



Wednesday, January 30, 2013

बस कुछ यूँ ही ....



दिन तो बीत  जाते है ,
रातें  रतजगा हो चली है ।
 नैन नीर  बहाते है ,
अपनों का सपना  बन जाने से ।
कब  हुआ ,कैसे हुआ ,क्यों हुआ ?
अब ये कहना  व्यर्थ  लगता है ,
क़ि
"बोया पेड़ बबूल  का आम कहाँ से पाओगे "
हमने तो
 लगाई थी अमराई
तुम्हारी" हरित क्रांति" ने
उसे" नीम का  वन" बना दिया ।
अब वन में वो साधू संत कहाँ ?
जो नीम की औषधि बना देते ,
हमे तो  नीम की छाँव भी तसल्ली देती है
क्या करे ?
वो भी योग के साथ साथ
बाजार में बंद डिब्बों में आ गई  है
इसीलिए तो ,
दिन तो बीत  जाते है
और
रातें  रतजगा हो गई है ।







Sunday, January 13, 2013

 दामिनी के लिए एक कविता 

 

"निमित्त"

मै ही सीता हूँ
जिसे
अपनी मर्यादा को
बचाने केलिए
वन भेज दिया

मैही शूर्पनखा हूँ
जिसे तुमने
प्रणय निवेदन करने पर
क्षत विक्षत कर दिया।

मै ही द्रोपदी हूँ
जिसे तुमने
अंधे के दरबार में
दांव पर लगा दिया।

कभी तुमने मर्यादा का
अहंकार किया
कभी तुमने
अपने पुरूष होने का
अहंकार किया
कभी तुमने
अपने पद का अंहकार किया
मुझे क्षत विक्षत
करके भी तुमने
मेरा ही अपहरण किया ?

मेरा चीर हरण
करके
मुझे महाभारत का
निमित्त बनाया ?

मैंने ही
तम्हें रचा ,तुम्हारा सरजन किया

तुमने मुझे

कभी बिह्डो में छोडा

कभी बाजार में बेचा

एक

सुंदर संसार की सहभागी बनू

ये समानता थी मेरी

कितु तुमने ही

मुझे कैकयी बनाया

मन्थरा बनाया

अपने ग्रंथो में,


मै चुप रही

आज तुमने मुझे

फिरसे

आदमियों के जंगल में

खड़ा करदिया है

बिकने के लिए


नही?

अब कोई मेरा
अपहरण नहीं करेगा
न ही, मेरा चीर हरण करेगा

न ही मुझे धरती में समाना होगा

न ही मुझे किसी की
जंघा पर बैठना होगा
मालूम है ?
तुम्हे
क्यो ?
क्योकि !
शक्ति ने
स्वीकार ली है,
नर- बलि |
shobhana chourey




Tuesday, December 18, 2012

मेरा शहर ,तुम्हारा शहर

सबके  अपने शहर होते है ।
कुछ सामने होते है ,
कुछ यादो में रहते है ।

चमकती बिन्दियों के सुनहरे पत्तों में
एक अदद  लाल   गोल "माथे की बिंदी "
खोजती रही  मै ,मेरे शहर में .....

सैकड़ो   तरह  की सजी  मिठाइयों के बीच 
कागज की पुडिया  में बंधे "पेड़े " की मिठास 
खोजती रही  मै , मेरे शहर में ....

मन्दिरों में बजते डी .जे .के शोर में ,,
घंटियों की सुमधुर  ध्वनि  और" हरे राम" की धुन 
खोजती रही मै, मेरे शहर में ....

मोबाईल फोन , लेपटाप की दुकानों की बाढ़ में 
मेरे बच्चों के बचपन का पुस्तकालय 
खोजती रही मै मेरे शहर में ....

अतीत क्या कभी बूढ़ा होता है ?
खोजने की जरुरत नहीं  
मेरा शहर "मार्डन  "  हो गया है 
मेरे पोते पोतियों (ग्रेंड चिल्ड्रेन )की तरह ।










Thursday, September 13, 2012

"और एक अभिलाषा "

 बहुत दिनों बाद कुछ लिख पा  रही हूँ ,इस बिच आप  सभी लोगो को थोडा थोडा ही पढ़ पाई ऐसा लगा मनो बहुत कुछ छुट रहा है कोशिश करुँगी आप सबसे जुडी रह पाऊ ।आपसभी ने मुझे समय समय पर यद् किया अनेकानेक धन्यवाद ।

नदी?
 कब ?कैसे जन्मी ?
अपनी
अनवरत यात्रा में
अनगिनत
 जीवन सींचती रही
अपने ही
 किनारों के  ।

किनारे सम्रद्ध  होते रहे,
समर्थ होते रहे  ।
यूँ तो,
 किनारे मिलते रहे
कभी नाव के सहारे
कभी पुल के माध्यम से
किन्तु,
नदी की अभिलाषा
 पनपती रही
अपने किनारों को,
आपस में जोड़ने की ।
और  ,
नदी
 अपनी ही इस जिद में
सिकुड़ती गई ,सिकुड़ती गई
और
एक दिन
सुनसान रेत
बन गई
नदी  :










Saturday, May 26, 2012

कुछ कड़ियाँ ,जो आपस में जुडती ही नहीं ?

     1.

मेरे सिरहाने
बैठी यादे
जुड़ जाती है
और
सक्रीय होकर
सपने बुन लेती है ,
अपनी कल्पनाओ की
झालरों के साथ 
       2.
फूलो की बस्ती में ,
पत्थरों का क्या काम?
रंगों की मस्ती में ,
सफेदी का क्या काम?
चंदा की चांदनी में ,
रूपसी का क्या काम?
सूरज की रौशनी में ,
चिरागों का क्या काम ?

        3.
अपराधी पिता को
बचाने
संकल्पित पुत्री को देखकर
उसी पिता के पुत्र का
उत्तर -
हाँ !वे ऐसा कर सकते है ?
उत्तराधिकारी को
परिभाषित कर गया .........












Sunday, April 08, 2012

बस कुछ यू ही ?

बहुत दिनों बाद अप सबसे मिलना हो रहा है सभी को स्नेह भरा नमस्कार |


बरसो से
कटोरा सामने रखकर
नुक्कड़ पर बैठी
कभी भी बूढी
न होने वाली
बुढिया

और
बरसो से
फुटपाथ पर
चाय और सिगरेट
बेचती
असमय ही
बूढी होती
बुढिया
मानो ,
अकर्मण्य सरकार का
लम्बा खोखला जीवन



Wednesday, November 16, 2011

ये सब यू ही नहीं ?

मेरा ये भ्रम
मुझे जीवन देता है
की चाँद ,
तुम मेरे साथ-साथ
चलते हो |
ये भ्रम ,ये आभास
ये कल्पना भी
तभी है
जब मै
तुम्हे चाँद
ही रहने देती हूँ |



तुम्हे पाऊं
तुमहारे कांधे प़र
सर रखू
ऐसी मेरी
कोई तमन्ना नहीं
तुम्हारी तरह
अपनों के काँधे
प़र बन्दूक रखू
ऐसी मेरी फितरत नहीं

तुम्हारे शब्दों के
तीर सहू
तुम्हारी अंकशायिनी बन
इतराऊं
सिर्फ
ये ही तो
मेरी किस्मत नहीं ?




Monday, September 05, 2011

बस कुछ यू ही .....

दो सामानांतर
रेखाओ को
काटती है
है एक
खड़ी लकीर |
ऐसा तुम !
कई बार कह चुके हो|

मै खोज में हूँ ?
वो अद्रश्य
खड़ी लकीर कहाँ से आई ?

तुम्हारी ख़ामोशी
मेरी ख़ामोशी
समानांतर
रेखा
तो नहीं ?

बहुत कुछ छिपाने की
तुम्हारी
ख़ामोशी

मेरे खालीपन की
ख़ामोशी को
समानांतर

कैसे मान लिया ?