Thursday, August 21, 2008
लोकगीत निमाड़ी
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धीर धीर साथ म्हारा गाव , असी म्हारी हँसी न उड़ाओ जिजिबाई धीरधीर साथ म्हारा गाओ पिऊ तो म्हारा परदेस जाइल छे ,सासु बाई देगा मख गाळ ओ जीजी बाई ...
बना /बननी [निमाड़ी लोक गीत ]
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मीना जडी बिंदी लेता आवजो जी, बना पैली पेसेंजर सी आवजो जी आवजो आवजो आवजो जी बना पैली पेसेंजर सी आवजो जी माथ सारु बीदी लाव्जो माथ सारु टीको , ...
Monday, August 18, 2008
वर्तमान
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खामोश रास्ता पार करते हुऐ, टूटन का एहसास न हुआ पर भीड़ भरी सड़क पर टूट सा गया मै | पक्षियों के कलरव ने तो , चुप्पी ही तोडी है मगर तुम्हारी एक...
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Saturday, August 16, 2008
भारत की समर्धि
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स्व्तंत्रता दिवस के दुसरे दिन से कुछ सकल्प ऐसे हो.......... नेता लोग भाषण देना छोड़ दे | कवि लोग ताना देने वाली कविता करना छोड़ दे| मौसम व...
Thursday, August 14, 2008
झंडे की खुशबु
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बचपन में जब केले का आधा टुकडा मिलता ,सेब की एक फांक मिलती तो उसका स्वाद अम्रत था आज के दर्जनों केलो में , किलो से स्टीकर लगे सेबों में वो मि...
लोकतंत्र
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राजा लोंगो का तो राज पाट चला गया किंतु हमारी मानसिकता आज भी राजा जैसी ही है ,फर्क इतना है पहले एक राजा होता था आज तो हर कोई राजा बननेको ब...
Monday, August 11, 2008
"बिदाई"निमाड़ी लोक गीत
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यह गीत लडकी की विदाई के समय यह गीत गया जाता है | इस गीत का भावार्थ कुछ इस तरह का है ,वधू जब फुल चुनने बाग़ में जाती है व्ही पर उसे वर मिलत...
"मंडप"निमाड़ी लोक गीत
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म्हारा हरिया मंडप माय ज्डाको लाग्यो रे दुई नैना सी [दो बार ] म्हारा स्स्राजी गाँव का राजवाई म्हारो बाप दिली केरों राज |ज्डाको लाग्यो रे .....
Tuesday, August 05, 2008
मौन
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जब मौन मुख्रण होता है , शब्द चुक जाते है | तब अहसासों की प्रतीती में , पुनः वाणी जन्म लेती है| और शब्दों की संरचना कर भावनाओ से परिपूर्ण हो...
Tuesday, July 29, 2008
बेटिया
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उन्होंने एक ही रजाई में अपने सुख दुःख बाटें है | वाचलता से नही , एक दूसरे की सांसो से एक ही रजाई में सोना, उनका आपस में प्यार नही , उनकी ...
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