Sunday, September 21, 2008
जाग्रत
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जीवन के नेराश्य को जिसने मुझे मुखरित किया उन क्षणों को ,जिसने मुझे वाणी दी आत्मप्रशंसा के अभिमान से निवर्त होकर आत्म विश्वास दीर्घजीवी हो पर...
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Friday, September 19, 2008
कुछ क्षनिकाए
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"आकाश और जमीन" आकाश की उचाईयो छूने के बाद सारा जहा मेरा अपना हो गया है और जमीन से जुड़े रहने की चाह में मुझसे मेरे अपने जुदा हो...
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मंजिल
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जिन्दगी से निराश कुछ नवयुवको को देखकर सन२००० मेंयह कविता लिखी थी तुझे पाने की चाह में , अपनी मासूमियत खो बैठे हम | तेरे नजदीक पहुंचते पहुंच...
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Tuesday, September 16, 2008
विश्वास
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मेरे जेहन में चोकोर पत्थर , धागे से बंधा हुआ मानो मेरे अनगिनत प्रश्नों का उत्तर रिक्तता और शून्य में खोजता अन्तर उनींदी आँखों की सोच खुली आँ...
Thursday, August 21, 2008
लोकगीत निमाड़ी
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धीर धीर साथ म्हारा गाव , असी म्हारी हँसी न उड़ाओ जिजिबाई धीरधीर साथ म्हारा गाओ पिऊ तो म्हारा परदेस जाइल छे ,सासु बाई देगा मख गाळ ओ जीजी बाई ...
बना /बननी [निमाड़ी लोक गीत ]
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मीना जडी बिंदी लेता आवजो जी, बना पैली पेसेंजर सी आवजो जी आवजो आवजो आवजो जी बना पैली पेसेंजर सी आवजो जी माथ सारु बीदी लाव्जो माथ सारु टीको , ...
Monday, August 18, 2008
वर्तमान
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खामोश रास्ता पार करते हुऐ, टूटन का एहसास न हुआ पर भीड़ भरी सड़क पर टूट सा गया मै | पक्षियों के कलरव ने तो , चुप्पी ही तोडी है मगर तुम्हारी एक...
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Saturday, August 16, 2008
भारत की समर्धि
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स्व्तंत्रता दिवस के दुसरे दिन से कुछ सकल्प ऐसे हो.......... नेता लोग भाषण देना छोड़ दे | कवि लोग ताना देने वाली कविता करना छोड़ दे| मौसम व...
Thursday, August 14, 2008
झंडे की खुशबु
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बचपन में जब केले का आधा टुकडा मिलता ,सेब की एक फांक मिलती तो उसका स्वाद अम्रत था आज के दर्जनों केलो में , किलो से स्टीकर लगे सेबों में वो मि...
लोकतंत्र
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राजा लोंगो का तो राज पाट चला गया किंतु हमारी मानसिकता आज भी राजा जैसी ही है ,फर्क इतना है पहले एक राजा होता था आज तो हर कोई राजा बननेको ब...
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