आपने जो लिखा है, वो सच में दिल छू जाता है। मैं हर बार माँ और बच्चे के रिश्ते पर कुछ पढ़ता हूँ, तो मन अपने-आप नरम हो जाता है। मैं महसूस करता हूँ कि माँ की साँसें सच में बच्चे से ही अपना अर्थ पाती हैं। उम्र कोई भी हो, माँ का दिल हमेशा वही रहता है पूरी तरह अपने बच्चे से जुड़ा हुआ।
आपने जो लिखा है, वो सच में दिल छू जाता है। मैं हर बार माँ और बच्चे के रिश्ते पर कुछ पढ़ता हूँ, तो मन अपने-आप नरम हो जाता है। मैं महसूस करता हूँ कि माँ की साँसें सच में बच्चे से ही अपना अर्थ पाती हैं। उम्र कोई भी हो, माँ का दिल हमेशा वही रहता है पूरी तरह अपने बच्चे से जुड़ा हुआ।
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