अभिव्यक्ति
Sunday, April 08, 2012

बस कुछ यू ही ?

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बहुत दिनों बाद अप सबसे मिलना हो रहा है सभी को स्नेह भरा नमस्कार | बरसो से कटोरा सामने रखकर नुक्कड़ पर बैठी कभी भी बूढी न होने वाली बुढिया और ...
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Wednesday, November 16, 2011

ये सब यू ही नहीं ?

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मेरा ये भ्रम मुझे जीवन देता है की चाँद , तुम मेरे साथ-साथ चलते हो | ये भ्रम ,ये आभास ये कल्पना भी तभी है जब मै तुम्हे चाँद ही रहन...
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Monday, September 05, 2011

बस कुछ यू ही .....

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दो सामानांतर रेखाओ को काटती है है एक खड़ी लकीर | ऐसा तुम ! कई बार कह चुके हो | मै खोज में हूँ ? वो अद्रश्य खड़ी लकीर कहाँ...
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Thursday, August 11, 2011

कभी कभी ......

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बहुत सारे आहार है फिर भी निराहार महसूस होती जिन्दगी| बहुत सारे आधार है फिर भी निराधार महसूस होती जिन्दगी | जब अटे पड़...
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Saturday, August 06, 2011

"सोच और सपने "

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सपनो के आकाश में चिर परिचित मेहमान आशाओ के , आकाक्षाओ के | मन के समुंदर में ढेर सारे मोती खुशियों के , आंसुओ के | तन के ठिकाने में एक नई स...
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Wednesday, July 06, 2011

"बस यू ही "

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दुकानों की, लम्बी कतार के बीच मेरा मकान कहीं खो गया है | जाना पहचाना था सबका आज अजनबी हो गया है | गगन चुम्बी इमारतों की नीरवता के समक्ष ख...
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Thursday, June 30, 2011

"समाधान "कहानी

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बहुत दिनों से कुछ नया नहीं लिख पाई हूँ | एक कहानी पोस्ट कर रही हूँ | अपने आसपास बहुत सी ऐसी बिखरी चीजे देखते है तो लगता है इन्ह...
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Tuesday, May 10, 2011

एक सजा ऐसी भी .....

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हम लोग लोगो को आदत सी हो जाती है जिस शहर में जो वस्तु प्रसिद्द हो उसका नाम , लेने की , अगर कोई ऐतिहासिक वस्तु के कार...
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Friday, May 06, 2011

"पर उपदेश कुशल बहुतेरे "

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आजकल हर व्यक्ति उपदेशात्मक बाते करने लगा है |दिन रात अध्यात्मिक ?चैनलों का प्रभाव शायद जीवन पर गहरा असर डाल रहा है बोलने में हाँ ?आचरण में ...
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Sunday, May 01, 2011

मजदूर दिवस जो जीवन पर्यन्त ख़ुशी का साथ निभाता है मेरे .. ....

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बैल गाडियाँ उबड खाबड़ रास्ते को पार करते हुए रात के करीब ९ बजे गाँव के भीतर प्रवेश कर चुकी थी गाँव में खबर फ़ैल चुकी थी बारात आ गई लाड़ी दु...
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शोभना चौरे
वेदना तो हूँ पर संवेदना नहीं, सह तो हूँ पर अनुभूति नहीं, मौजूद तो हूँ पर एहसास नहीं, ज़िन्दगी तो हूँ पर जिंदादिल नहीं, मनुष्य तो हूँ पर मनुष्यता नहीं , विचार तो हूँ पर अभिव्यक्ति नहीं|
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