अभिव्यक्ति
Wednesday, February 27, 2013

जातक अपने शरीर पर तिल देखकर जाने कैसा होगा भविष्य

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जातक अपने शरीर पर तिल देखकर जाने कैसा होगा भविष्य तिल मात्र सौंदर्य बोधक ही नहीं होते हैं, ये व्यक्ति के भविष्य में घटित होने वाली...
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Friday, February 15, 2013

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 बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाये । बसंत शीत की बंद कोठरी के द्वार से अंधेरो को उजाले में लाया है बसंत । महकती कलियों के...
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Wednesday, January 30, 2013

बस कुछ यूँ ही ....

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दिन तो बीत  जाते है , रातें  रतजगा हो चली है ।  नैन नीर  बहाते है , अपनों का सपना  बन जाने से । कब  हुआ ,कैसे हुआ ,क्यों हुआ ? अब ये...
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Sunday, January 13, 2013

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 दामिनी के लिए एक कविता    "निमित्त" मै ही सीता हूँ जिसे अपनी मर्यादा को बचाने केलिए वन भेज दिया मैही शूर्पनखा...
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Tuesday, December 18, 2012

मेरा शहर ,तुम्हारा शहर

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सबके  अपने शहर होते है । कुछ सामने होते है , कुछ यादो में रहते है । चमकती बिन्दियों के सुनहरे पत्तों में एक अदद  लाल   गोल "माथे...
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Thursday, September 13, 2012

"और एक अभिलाषा "

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 बहुत दिनों बाद कुछ लिख पा  रही हूँ ,इस बिच आप  सभी लोगो को थोडा थोडा ही पढ़ पाई ऐसा लगा मनो बहुत कुछ छुट रहा है कोशिश करुँगी आप सबसे जुडी र...
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Saturday, May 26, 2012

कुछ कड़ियाँ ,जो आपस में जुडती ही नहीं ?

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     1. मेरे सिरहाने बैठी यादे जुड़ जाती है और सक्रीय होकर सपने बुन लेती है , अपनी कल्पनाओ की झालरों के साथ         2...
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Sunday, April 08, 2012

बस कुछ यू ही ?

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बहुत दिनों बाद अप सबसे मिलना हो रहा है सभी को स्नेह भरा नमस्कार | बरसो से कटोरा सामने रखकर नुक्कड़ पर बैठी कभी भी बूढी न होने वाली बुढिया और ...
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Wednesday, November 16, 2011

ये सब यू ही नहीं ?

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मेरा ये भ्रम मुझे जीवन देता है की चाँद , तुम मेरे साथ-साथ चलते हो | ये भ्रम ,ये आभास ये कल्पना भी तभी है जब मै तुम्हे चाँद ही रहन...
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Monday, September 05, 2011

बस कुछ यू ही .....

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दो सामानांतर रेखाओ को काटती है है एक खड़ी लकीर | ऐसा तुम ! कई बार कह चुके हो | मै खोज में हूँ ? वो अद्रश्य खड़ी लकीर कहाँ...
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शोभना चौरे
वेदना तो हूँ पर संवेदना नहीं, सह तो हूँ पर अनुभूति नहीं, मौजूद तो हूँ पर एहसास नहीं, ज़िन्दगी तो हूँ पर जिंदादिल नहीं, मनुष्य तो हूँ पर मनुष्यता नहीं , विचार तो हूँ पर अभिव्यक्ति नहीं|
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