Friday, March 25, 2011

"यादो की पोटली "

आज एक पुरानी कविता ही पोस्ट कर रही हूँ |
शायद आप सब भी मेरे साथ यादो में खो जाये |





मेरे सिरहाने रखी
यादो की पोटली में
बंधी यादों ने

विनती कर मुझसे कहा -
अब
तो मुझे खोल दो
कितने बार ही
खुश होती हूँ
जब तुम ये पोटली खोलती हो?
अब मेरी आजाद होने की बारी है
लेकिन ,तुम मुझे?
तह करके फिर से लगा देती हो
करीने से
और बांध देतो हो फिर पोटली में
मै तुम्हारी
इस करीने वाली आदत से
परेशान हो गई हूँ
यादो ने बड़ी मासूमियत
से कहा-
मुझे बिखरे रहना ही अच्छा लगताहै|
और यादो ने
बाहर निकलने के लिए
अपने लिए अपने कोना निकाल ही लिया
और मुझे मुंह चिढ़ाकर
बिखरने लगी

तुम्हारी मीठी याद
जब तुमने अपनी माँ की
आँखों में
अपने लिए प्यार का सागर देखा
तो तुमने महसूस किया
ईश्वर तुम्हारे पास है
जब तुमसे
सबंधित ,असंबंधित,और आभासी लोग भी
भी तुमसे अपार स्नेह रखते है
तब भी ईश्वर को तुमने
महसूस किया है
जब जब ,तुममे इर्ष्या द्वेष
के भाव जगे है
तब भी तो तुम्हारे अन्दर
बसे ईश्वर ने ही
तुम्हे उससे उबारा है |
तुम्हारी इन डबडबाई
आँखों को देखकर मै
तुम्हारे इन आंसुओ को
लेकर मै
वापिस पोटली में चली जाती हूँ
क्योकि
ये ही तो तुम्हारी पूँजी है |

23 टिप्पणियाँ:

shikha varshney said...

ऐसी ही तो होती है यादें ...मर्मस्पर्शी रचना.

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

ये पोटलियाँ अपने में कितने बेशकीमती खजाने छिपाए रहती हैं... एक ऐसी दौलत जो हर किसी के पास है और रहती है उसी के पास जो इसकी क़द्र करना जानते हैं.. जैसे आप!!

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

यादे सच में ऐसी ही हुआ करती हैं .... ....संवेदनशील भाव शोभना जी

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आपकी यह यादों की पोटली पहले भी बहुत पसंद आई थी ..आज भी ...बहुत सुन्दर रचना

प्रवीण पाण्डेय said...

यादें तो सच में प्यारी होती हैं, रोचक होती हैं।

rashmi ravija said...

बहुत ही कमाल की है ये यादों की पोटली
बेहतरीन प्यारी सी रचना...

राज भाटिय़ा said...

ये यादों की पोटलियाँ कभी कभी सुख देती हे तो कभी कभी बहुत दुख देती हे, बहुत सुंदर रच्ना, धन्यवाद

Patali-The-Village said...

बहुत सुंदर मर्मस्पर्शी रचना| धन्यवाद|

ZEAL said...

.

इश्वर अनेकों रूप में हमारे आस पास ही होते हैं । बहुत बार साक्षात दर्शन किये हैं इश्वर के , स्नेह करने वालों में। आँखें जब डबडबाती हैं तो हर बार कोई अपना मिल ही जाता है इस भीड़ में उन मोतियों को संभालने के लिए ।

स्मृतियों की सुन्दर , सरल पोटली भावुक कर गयी ।

.

गिरधारी खंकरियाल said...

यादो के पात अनुभव भी कराती है नेत्रों को छलकाती भी है सुख के साथ दुःख भी बाँटती है

Suman said...

bahut sunder hai aapki yaadonki potli...

Sunil Kumar said...

यादों की पोटली कभी कभी खोल लेनी चाहिए संवेदनशील रचना , बधाई

ज्योति सिंह said...

yaade aesi hi hoti hai ,bahut sundar .

रचना दीक्षित said...

यादों का वर्तमान से द्वन्द. सुंदर मर्मस्पर्शी रचना.

Apanatva said...

marmsparshee rachana.
aap apana phone number de deejiye mai aapko sampark kar lungee.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 29 -03 - 2011
को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

http://charchamanch.blogspot.com/

ajit gupta said...

एक बन्‍द पिटारी खोली तो
कुछ गर्द उड़ी, कुछ सीलन थी
कुछ पन्‍ने उड़कर हाथ आ गए
इक बूंद आँख से तभी गिरी -----
मुझे मेरी कविता की पंक्तियां याद आ गयी। शौभना जी यह पोस्‍ट मैंने पहले ही पढ़ ली थी लेकिन नेट के कारण टिप्‍पणी नहीं कर पायी थी। बहुत भावुक कविता है, बधाई।

V!Vs said...

yaadein yaad ati hain........

कुश्वंश said...

जब जब ,तुममे इर्ष्या द्वेष
के भाव जगे है
तब भी तो तुम्हारे अन्दर
बसे ईश्वर ने ही
तुम्हे उससे उबारा है |

यादों की पोटली बेहतरीन

रश्मि प्रभा... said...

yaadon ki potli kahti hai mujhe kholo ... yaadon ke sang yun baaten ek uplabdhi hai, bahut badhiyaa

सुशील बाकलीवाल said...

अतीत की सुनहरी स्मृतियां शायद ऐसी ही पोटलियों में महफूज रह पाती हैं ।

सुशील बाकलीवाल said...

अतीत की सुनहरी स्मृतियां शायद ऐसी ही पोटलियों में महफूज रह पाती हैं ।

अनामिका की सदायें ...... said...

bahut ander tak kuchh jagah bana gayi aapki ye kavita.