Sunday, May 01, 2011

मजदूर दिवस जो जीवन पर्यन्त ख़ुशी का साथ निभाता है मेरे .. ....

बैल गाडियाँ उबड खाबड़ रास्ते को पार करते हुए रात के करीब ९ बजे गाँव के भीतर प्रवेश कर चुकी थी गाँव में खबर फ़ैल चुकी थी बारात आ गई लाड़ी दुल्ल्व(दूल्हा दुल्हन ) भी आ गये |दुल्हन बड़ी मुश्किल से बैल गाड़ी से नीचे उतर पाई थी दूल्हें राजा तो गाँव में प्रवेश करते ही गाड़ी से कूद पड़े थे दुल्हन को तो घर तक बैलगाड़ी में ही जाना था (दुल्हन जो थी ) साथ में हम उम्र नन्द भी थी जो अभ्यस्त थी बैल गाड़ी में चढने उतरने की इसलिए कोई मुश्किल नहीं |दुल्हन को अपने कपडे जेवर भी सम्भालने थे (वैसे आजकल की तरह कोई डिजाइनर लहंगे नहीं थे )फिर भी बनारसी साड़ी तो भारी ही तो होती है न ?साथ में गाँव की बहुत सारी औरते और बच्चो की निगाहे दुल्हन पर ही लगी थी |
सर पर पल्ला सम्भालते सम्भालते दुल्हन बेहाल उस पर द्वार पर ही बहुत सारी रस्मे |मायके छोड़ने का दुःख अलग |
कोई दबे शब्दों में कह रहा था बिजली आ गई !बाद में दुल्हन को मालूम पड़ा की इसी साल गाँव में बिजली आई थी और दुल्हन को सब भाग्यशाली मान रहे थे की देखो लाड़ी के आने के पहले ही गाँव में बिजली आ गई इस लिए दुल्हन को सब बिजली कहने लगे |
बहुत सारी रस्मो के बाद हंसी मजाक के बाद मंडप में मुह मीठा कराने के बाद दुल्हन को जहाँ आंगन के पास में एक बैठक में बहुत सारी महिला रिश्तेदारों के साथ सुला दिया गया |
दुल्हन माँ, पिता ,दादी,दादा , भाई, बहन सबको याद कर सुबकती रही |
किन्तु सुबह की लालिमा ने, घर की बुजुर्ग महिलाओ ने ,दुल्हन को प्यार से उठाया ढेर सारे आशीर्वाद दिए बलाए ली तो दुल्हन जो बहू बन गई थी रात की बात को पीछे छोड़ सुबह के स्वागत में आतुर हो उठी थी |
सन १९७४ में देशव्यापी ट्रक बस रेल हड़ताल थी १ मई को और इसीलिए मेरी बारात को बैलगाड़ी से आना पड़ा और
उस समय मध्यमवर्गीय परिवारों में कार का प्रचलन बहुत कम था |आज ३८ साल बाद भी अपनी अनोखी बारात और दिवा लग्न (दिन का शादी का मुहूर्त )आज भी हुबहू आँखों में चित्रित है |
बड़ो के आशीर्वाद से और अपने प्रगतिवादी ,प्रयोगवादी सादगीपूर्ण ससुराल परिवार ने मेरे जीवन के ३८ सालो को खुशिया ही खुशिया दी है |
वैसे मजदूर दिवस और महाराष्ट्र दिवस 1st may को होता है और जब शादी के बाद मुंबई रहना हुआ तो हर साल शादी की सालगिरह की छुट्टी मिल ही जाती थी जिसमे बैलगाड़ी के धचके कम ही याद आते थे |गेटवे ऑफ़ इण्डिया और चौपाटी की भेल में बेचारी बैलगाड़ी की यात्रा ?
आइये कुछ गिने चुने छाया चित्र देख लिए जाय |




पाणिग्रहण संस्कार( माँ पिताजी )




वरमाला( पहचानिए )?
जो भी यह चित्र देखता है श ही लेता है की कम से कम दूल्हा कुरता तो पहन लेते ?




अब उस समय हमारे यहाँ रिसेप्शन का रिवाज नहीं था तो तो दीवाल पर जाजम लगा दी और खड़ा कर दिया
हम दोनों को |



दोनों परिवार ख़ुशी से बतियाते हुए न ही समधियो जैसी कोई अकड ,न ही !लडकी ब्याहने का तनाव




शादी के तीसरे दिन खेत बाड़ी की सैर



और फिर दो महीने बाद मुंबई (goreगाँव )का घर
उस समय मेरे काका ससुर अमेरिका से आये थे शादी में और उनके पास एक मात्र कलर फोटो का केमेरा था जिसमे स्लाइडमें फोटो होते थे |जिसे प्रोजेक्टर के सहारे देखते थे बाद में उन्होंने वही से ये कापिया भेजी थी |
अन्यथा कोई फोटो मिलना मुश्किल ही था क्योकि फोटोग्राफर का खर्चा बजट में नही था |
शादी के बाद एक स्टूडियो में लिया गया चित्र जरुरी है |




22 टिप्पणियाँ:

ZEAL said...

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शोभना जी ,

आपके विवाह का अति रोचक वर्णन पढ़ा । बैलगाड़ी से आपकी विदाई यात्रा ज़रूर मजेदार रही होगी , हिचकोले खाते हुए । मजदूर दिवस के साथ आपका यह संस्मरण सदैव याद रहेगा अब।

आप दोनों को विवाह की वर्षगाँठ पर हार्दिक शुभकामनाएं। सुन्दर चित्रों के लिए आभार।

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ajit gupta said...

शोभनाजी, बैलगाड़ी की यात्रा बड़ी अच्‍छी लगी। गाँव की शादी का आनन्‍द तो हमने भी उठाया है। आपको विवाह की वर्षगाँठ पर हार्दिक बधाई।

रचना दीक्षित said...

शोभना जी सबसे पहले शादी की वर्षगाँठ पर अनेकों बधाईयाँ. बहुत अच्छा संस्मरण और चित्रों ने तो और भी चार चाँद लगा दिए. शुभकामनाएँ और आभार.

प्रवीण पाण्डेय said...

बहुत बहुत बधाई हो विवाह की वर्षगाँठ पर। हड़ताल तो अवरुद्ध करने के लिये ही होती है, जीवन फिर भी चलेगा ही।

राज भाटिय़ा said...

शोभना जी आप को विवाह की वर्षगाँठ पर हार्दिक शुभकामनाएं, मेरी मां की डोली बेलगाडी मे आई थी, उन दिनो तो साईकिल भी किसी किसी के पास होती थी, आप ने बहुत सुंदर विवरण दिया शादी का, धन्यवाद

दिगम्बर नासवा said...

आपके विवाह का रोचक वर्णन ... सुन्दर चित्र ... विवाह की वर्षगाँठ पर बहुत बहुत बधाई ...

सुशील बाकलीवाल said...

वैवाहिक वर्षगांठ पर हार्दिक बधाईयां...

मनोज कुमार said...

बड़ा आनंद आया आपके साथ यादों के गलियारे में घूम कर।
विवाह की वर्षगाठ पर हार्दिक शुभकामनाएं।

kshama said...

1974 me mera bhee byah hua! Lekin mai bailgaadee waale gaanv se Dilli jaise mahanagar ja pahunchi!
Bahut sundar sansmaran likha hai aapne!Anek shubhkamnayen!

k.r. billore said...

shobhanaji ,aapko shadi ki salgirh par ham sabki or se hardik shubh-kamana pranam .ati sunder vivah ka varnan padhkar purani yado ne phir naye rang bhar diye ..... punh shubh

Rakesh Kumar said...

अब पता चला कि ब्लॉग जगत में भी बिजली कैसे आई .
शादी की ३८वीं वर्षगांठ पर आपको बहुत बहुत बधाई.
दुआ और कामना करता हूँ की आपकी बिजली की
रोशनी घर-परिवार,समाज और देश को युग युग तक रास्ता दिखाए.

Mrs. Asha Joglekar said...

आपके विवाह की यादें ताज़ा हो गईं और हमें शादी का मजेदार किस्सा मिला सचित्र । विवाह की वर्षगांठ की बधाई ।

Shubham Sadh said...

Pranam Taiji, Happy Marrige anniversary. Lal Jajam.. kitna pyara laga raha tha, Aaj kal is tarh ka vivah..koi soch bhi nahi sakta. Aapki nai Kitab par aapko bahut bahut Badhaiyan hum sab ki or se.

अमिताभ श्रीवास्तव said...

बेहतरीन।

कोई लौटा दे मेरे बीते हुये दिन...., एक गानाभर ही है जहां न लौटने का दुख छिपा है, मगर इसे कहते हैं जिन्दादिली...., आपने बहुत सुन्दर अंदाज में अपने गुजारे दिन जगाये है, पुनः लौटा लिये हैं।
रोचक भी और रोमांचक भी।

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

बधाई आपको..... बहुत अच्छा लगा यादों की सुंदर पोटली खोली आपने .... सारी फोटो बहुत प्यारी हैं

ज्योति सिंह said...

waah ye adbhur najare rahe ,tasvir bhi badhiya rahi ,dhero badhai is barshgaanth ki ,rochak varnan .

rashmi ravija said...

अरे वाह...बधाइयां..बधाइयां
और आपको बहुत बहुत शुक्रिया भी कि अपने याद दिलाया...
वरना ऐसी नायाब पोस्ट अगर छूट जाती तो बहुत अफ़सोस होता....
चित्र...और विवरण...सब बहुत ही रोचकता से बयाँ किया है....आप बहुत प्यारी लग रही हैं..
और आपको बनियान पे क्यूँ एतराज है....दक्षिण में तो दूल्हा...खाली बदन रहता है.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

शोभना जी ...

बहुत रोचक वर्णन विवाह का .... शादी कि सालगिरह कि बधाई ...देर से आना हुआ ...क्षमा चाहती हूँ

सतीश सक्सेना said...

विवरण और फोटो बहुत अच्छे लगे ! हार्दिक शुभकामनायें आपको !

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

वाह, इसे कहते हैं नोस्टैल्जिक पोस्ट। हम कुर्ते के बारे में कुछ नहीं कहेंगे। शुभकामनाएं!

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

कल 04/05/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

पंछी said...

बहुत बहुत शुभकामनायें ..रोचक संस्मरण