Friday, August 13, 2010

कुछ यू ही ?बस ऐसे ही ??

देश के वीर सिपाहियों को और जो अपने देश की रक्षा करने में
शहीद होकर वीरता को प्राप्त हुए है ऐसे वीरों को शत -शत नमन | स्वतंत्रता दिवस
के अवसर पर सभी को अनेक शुभकामनाए और बधाई |
-----------------------------------------------------------------------
कुछ यू ही कुछ ऐसे ही ??

गरीब कभी अपनी गरीबी का रोना नहीं रोता
अमीर कभी अपनी अमीरी का बखान नहीं करता |

बी. पि .एल कार्ड गरीब की सरकारी पहचान
मोटा चंदा अमीर की सरकारी पहचान |

सरकार तो पहरेदार हो गई है हमारी
न हम गरीब बन पाए और न अमीर को छु पाए

बच्चों को पालने की दरकार है
बूढों को सम्भालने की दरकार है
जो ये काम न कर सके
उनकी तो जवानी ही बेकार है

हम जानते है आशा दुखो का कारण है |शायद दूसरों से आशा लगाने को ही हमने अपनी नियति बना लिया-

अपने अतीत का गुणगान करते थकते नहीं ?
जब अवसर मिला तो
अपने ही सुखो में उलझे रहे
और आज फिर से
आशा लगाये बैठे है कि ,
आज के बच्चे ही हमारे देश के
भावी कर्णधार है
हम भूल गये?
हम भी तो कभी बच्चे थे
और ये गीत हर साल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर गाते थे ,सुनते थे -

हम लाये है तूफान से कश्ती निकाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के .......

वन्दे मातरम.
शोभना

23 टिप्पणियाँ:

वन्दना said...

और आज फिर से
आशा लगाये बैठे है कि ,
आज के बच्चे ही हमारे देश के
भावी कर्णधार है
हम भूल गये?
हम भी तो कभी बच्चे थे
और ये गीत हर साल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर गाते थे ,सुनते थे -

हम लाये है तूफान से कश्ती निकाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के .......

बस यही तो भूल गये हैं और हमारे बच्चे भी भूल जायेंगे एक दिन हमारी ही तरह्…………और ये दर्द पीढी दर पीढी इसी तरह फ़ैलता रहेगा मगर हल किसी के पास तब भी नही होगा।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सच है हमने भी आज़ादी का दर्द कहाँ समझा है..यदि हमारी पीढ़ी ने समझा होता तो आज यह हाल नहीं रहा होता ...

nilesh mathur said...

वाह! क्या बात है, बहुत सुन्दर !

ajit gupta said...

जब तक हम कमर कसकर कार्य करने के लिए तैयार नहीं होंगे तब तक कुछ भला नहीं होगा। आपकी कविता पसन्‍द आयी।

kshama said...

आज के बच्चे ही हमारे देश के
भावी कर्णधार है
हम भूल गये?
हम भी तो कभी बच्चे थे
और ये गीत हर साल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर गाते थे ,सुनते थे -
Aaj hamara desh jaisa bhi hai,ham sabhi uske zimmedaar hain...

ABHIVYAKTI said...

Time has changed but I feel that patriots were always and will be always..
We stand tall becoz majority is united

बेचैन आत्मा said...

गरीब रोता है, फूट-फूट कर रोता है, यह अलग बात है कि हम सुन नहीं पाते.

प्रवीण पाण्डेय said...

भारतीय समस्याओं पर कविता का प्रहार।

shikha varshney said...

सच है एकदम सच..

वाणी गीत said...

बच्चों को पालने की दरकार है
बूढों को सम्भालने की दरकार है
जो ये काम न कर सके
उनकी तो जवानी ही बेकार है...
बिलकुल सही ..!

विनोद कुमार पांडेय said...

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई!!!!!

रचना said...

shobhna ji
achchi lagii ap ki yae kavita

कविता रावत said...

हम लाये है तूफान से कश्ती निकाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के .......
....बस यही तो भूल गये हैं और हमारे बच्चे भी भूल जायेंगे एक दिन हमारी ही तरह्…………और ये दर्द पीढी दर पीढी इसी तरह फ़ैलता रहेगा मगर हल किसी के पास तब भी नही होगा।
... AAj yahi dard saalta hai jinke andar abhi deshprem umadta hai.. .
chintansheel post..
स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई!!

Manoj K said...

अच्छी रचना, सही मौके पर सही-सही बात कह दी आपने

जयकृष्ण राय तुषार said...

very nice shobhanaji

वन्दना अवस्थी दुबे said...

स्वाधीनता दिवस की अनन्त शुभकामनाएं.

वन्दना अवस्थी दुबे said...

स्वाधीनता दिवस की अनन्त शुभकामनाएं.

दिगम्बर नासवा said...

ये गीत पीडी के साथ ख़त्म हो जाएँग..... आज ये दिन एक छुट्टी से बॅड कर कुछ नही ...

रचना दीक्षित said...

आज के बच्चे ही हमारे देश के
भावी कर्णधार है
हम भूल गये?
हम भी तो कभी बच्चे थे
और ये गीत हर साल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर गाते थे ,सुनते थे -
सच है एकदम
स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई!!!!!

डा. अरुणा कपूर. said...

स्वगरीब कभी अपनी गरीबी का रोना नहीं रोता
अमीर कभी अपनी अमीरी का बखान नहीं करता |


....आप का कथन बिलकुल सही है!....स्वतंत्रता दिवस पर बहुत बहुत बधाई!....

धर्म सिंह........;;;;;.. (इक अजनबी) said...

दी ....
नमस्ते
स्वतंतरता दिवश की बहुत बहुत बधाई
बहुत ही अच्छा प्रस्न पुछा है आप ने हम सभी से इस रचना के माध्यम से की हर साल हम बस खाली भाषण और उपदेश ही पास करते रहते है
नयी पीढ़ी को हमारे बुजुर्गों ने हमें और हम अपने बच्चों को .....

ज्योति सिंह said...

बच्चों को पालने की दरकार है
बूढों को सम्भालने की दरकार है
जो ये काम न कर सके
उनकी तो जवानी ही बेकार है
बहुत सुन्दर रचना इस अवसर पर ,मै इन्दोर उज्जैन और भोपाल गयी रही दस दिनो तक आज आई हू आपको हार्दिक बधाई स्वतंत्रता दिवस की .

k.r. billore said...

Shobhnaji, kya hamare kandhe itne kamjor the ,ya hum iska vajan uthane ke kabil na the ,karegi faisla aane wali pidhi-kyo hum itna khamosh the ? kayar na the kaatar ho dekhte rahe,kya hum gane walo ki toli ke sirf harkare the ----kamna billore mumbai ,,,,,