Friday, February 15, 2013

 बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाये ।

बसंत










शीत की बंद कोठरी के द्वार से
अंधेरो को उजाले में लाया है बसंत ।

महकती कलियों के लिए भोरो का ,
प्रेम संदेश लाया है बसंत .

पीले से मुख पर बसंती आभा
बिखेरता हुआ आया है बसंत .

किसानो के लिए फसलो की सोगात
लेकर आया है बसंत .

जीवन को जीवन देने ,
फ़िर से आया है बसंत .

और पढ़ते हुए बच्चो के लिए ,
देवी माँ सरस्वती का वरदान
लेकर आया है बसंत ।

एक कविता 




" भोजन मंत्र "

ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्।
ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना॥



5 टिप्पणियाँ:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सुंदर अभिव्यक्ति ... बसंत पंचमी की शुभकामनायें

अल्पना वर्मा said...

बासंती कविता ...शुभकामनाएँ.

रश्मि प्रभा... said...

बसंत की मोहक अनुभूति

वाणी गीत said...

अमूमन वसंत ऐसे ही आता है , इस बार मौसम कुछ बदला है .
सुन्दर गीत वसंत का !

रचना दीक्षित said...

बसंती बयार सभी के लिये नए मायने ले कर आती है.

मनमोहक प्रस्तुति.