Thursday, May 21, 2009

अपनी बात


आज मेरी एक सहेली का देवास से फोन आया हाल चाल पूछने

वो एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका है
मैंने पूछा ?और छुट्टिया कैसी चल रही है ?
इस पर बडे दुखी मन से बोली अरे कहा ? देवास को सूखा जिला घोषित कर दिया है तो मध्यान भोजन में ड्यूटी लगी हुई है
मैंने पूछा ?बच्चे आते है क्या ?
वह बोली- बडी मुश्किल से एक या दो बच्चे आते है फ़िर इतना खाना क्या सब नुकसान ही जाता होगा ?और इसके आगे और कुछ ज्यादा वो बता भी नही पाई पर इतना जरुर कहा -हमारी तो सब छुट्टिया तो बर्बाद हो गई ,और इधर उधर की बाते करके फोन रख दिया
मै हमेशा उसे उपदेश देती , बच्चो को तुम्हे आदर्श नागरिक बनाना हैउन्हें अच्छे से पढ़ना है ,वह हमेशा मुझे अपनी नोकरी की उलझन बताती की उनके उपर पढाई के आलावा कितनी ही जिम्मेवारी है मध्यान भोजन तो है ही इसके आलावा सर्वे करना .पोलियो की दवा पिलाने की ड्यूटी ,कभी ट्रेनिग आए दिन चुनावो का काम और भी कई तरह के काम होते जन्हें पूरा करना पड़ता है, इन सबमे पढाई गौण हो जाती है ,और सरकारी शिक्षक और स्कूल की हालत बेहद खराब है ऐसा हर नागरिक सोचने लगता है
गर्मी की छुट्टियों में मध्यान भोजन का क्या ओचित्य है ?वो भी सूखा क्षेत्र मे.......

5 टिप्पणियाँ:

अमिताभ श्रीवास्तव said...

are waah, devas se ph aapko aaya, man mera vnha chala gaya../devas meri janmbhoomi jo thahri/
devas ke haal-chaal mujhe apne mitra se prapt hote rahte he, sach he sookhaa shetra he vo..shipra bhi sookh gai he// halanki barso ho gaye nahi gaya vnha, par dost ka ph vnha ki sthitiyo se avagat karataa rahta he/kher../
sarkaari shikshako ke haal thik usi tarah behaal he jese sookha shetra ke// vese..suna he unki tankhvaah achhi ho gai he ab, lihaaza unke kaam ke hisaab se ab thik he///aour jnha tak madhyanh bhijan aadi ki baat he to sarkaari kaam kaaz aour uska aouchitya nahi poochha karte///ynha leepaa poti bhi to karni hoti he//
mudda achha he aapka//vicharne yogya//
dhnyavaad jo devas ki yaad taazaa karai/bhale hi uske sookhepan ke saath/

Mamta said...

BHOJAN KE BAJAAY SHUDH JAL JYADA AAVYSHYAK HE AAPKI SOCH JAGRATI KA KARYA KARATI HAI SADHUVAD MAMTA

शोभना चौरे said...

amitabhji ,mamtaji bhut bhut dhnywad

दिगम्बर नासवा said...

काश हमारी सरकार का सूचना तंत्र इतना सजग होता...........वो इन बातों को पहले से ही या देख कर भी सचेत हो जाती...........पर उसे तो केवल अपनी उपलब्धि दिखानी है............

अल्पना वर्मा said...

yah sthiti bhi sarkari tantr ki avayvstha ka ek namoona hai.