Saturday, September 05, 2009

छाया


जो दूसरी दुनिया
में चले जाते है
उनका जीवन
पूजनीय और अनुकरणीय
हो जाता है
जो इस दुनिया में
रह जाते है

वो असहनीय
हो जाते है |

बहुत साल पहले एक कविता लिखी थी आज पितृ पक्ष के अवसर पर पोस्ट कर रही हूँ |

पितृ
पक्ष में पुरखो को श्रधा सहित [सन १९८८ में जनधर्म में प्रकाशित ]

उन्होंने तो हमे दी थी
घने दरख्तों की छाया ,
जिसमे हम
भरपूर फले भी ,फूले भी
और जिन्होंने सदैव की हमारे
सुख की कामना
और हम है
अभी से आतंकित
अपने भविष्य के प्रति
आशंकित
हमेशा अपनों से शंकित
क्योकि हमने ही
तो दी है इन्हे,

बोगनबेलिया
और मनी प्लांट
की छाया|

10 टिप्पणियाँ:

Mrs. Asha Joglekar said...

kahan to ghane darakht aur kanha money plant aur bogan bel. ye to hona hee tha.

आनन्द वर्धन ओझा said...

शोभनाजी,
पित्रि-पक्ष... budhe बरगद का चित्र... और आपकी कविता बहुत कुछ याद दिला गई ! सच है, हम चाहकर भी उतने छायादार, उतने घने और शीतलता देनेवाले नहीं बन सके ! 'गिव एंड टेक' की दुनिया में जो देंगे, वही तो पायेंगे ?
आपकी पंक्तियाँ मन को छूती हैं और उस घनी छाया की पावन स्मृति से मन को भर देती हैं ! आभार !

अमिताभ श्रीवास्तव said...

jeevan ka sach he yeh ki doosari duniya me jaane vale poojaniya ho jaate he jabki is duniya me rahne vaalo ko koi poochhta nahi..// marne vale hamesha hi aadarniya kyo ho jaate he? kya ham jeete jee unhe aadar nahi de sakte????
savaal mere mastishk me hamesha koundhataa rahta he, par javaab nahi milataa/kher..
aapki kavita me jis tarah ki upama he vo kaabile taarif he/ vat vraksh ab boganbeliye aour mony plant hi to rah gayaa he/ bahut gahraai vaali rachna he/

दिगम्बर नासवा said...

AAJ BARGAD KA PED AAPKE BLOG PAR BAAP DAADAAON KI PARAMPARA KI YAAD DILAATA HAI ....... AAPKI RACHNA MEIN COPA SASNDESH BHI BAHOOT KUCH SOCNE KO MAJBOOR KARTA HAI ......

राज भाटिय़ा said...

शोभना जी... यह दुनिया है इस मै सब तरह के लोग है आप की कविता दिल को छू गई,
धन्यवाद

hem pandey said...
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hem pandey said...

लगता है जनधर्म में छपी यह कविता पढ़ने से रह गयी थी. आपने ठीक कहा है, हम अपनों से शंकित इसी लिये रहते हैं -

क्योकि हमने ही
तो दी है इन्हे,

बोगनबेलिया
और मनी प्लांट
की छाया|

Priya said...

dil ko choo gai

Anonymous said...
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Anonymous said...
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