Sunday, April 08, 2012

बस कुछ यू ही ?

बहुत दिनों बाद अप सबसे मिलना हो रहा है सभी को स्नेह भरा नमस्कार |


बरसो से
कटोरा सामने रखकर
नुक्कड़ पर बैठी
कभी भी बूढी
न होने वाली
बुढिया

और
बरसो से
फुटपाथ पर
चाय और सिगरेट
बेचती
असमय ही
बूढी होती
बुढिया
मानो ,
अकर्मण्य सरकार का
लम्बा खोखला जीवन



17 टिप्पणियाँ:

परमजीत सिहँ बाली said...

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति।

डा. अरुणा कपूर. said...

शोभना जी!...स्वागत है आपका!...बहुत दिनों बाद आप आई और इतनी सुन्दर रचना का उपहार दिया....शुभकामनाएं!

kshama said...

Bade dinon baad aapko padhna bahut achha laga!

प्रवीण पाण्डेय said...

मार्मिक स्थिति समाज की, विकास की।

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

दीदी,
सचमुच बहुत लंबा बीत गया.. मगर सारी शिकायतें दूर हो गयीं इस कविता से!! दिल को छूती हुई रचना!!

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

मानो ,
अकर्मण्य सरकार का
लम्बा खोखला जीवन

Bahut Badhiya...Gahan Abhivykti...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सटीक और सार्थक रचना ...

रचना दीक्षित said...

अकर्मण्यता लंबे जीवन को खोखला कर देती है. बेमानी बना देती है...

अत्यंत सार्थक सन्देश. आभार इस सुंदर प्रस्तुति को हम सब तक पहुंचाने के लिये.

Ratan singh shekhawat said...

सुन्दर प्रस्तुति

सदा said...

सच्‍चाई बयां करती पंक्तियां ...

परी देश की शह्जादी said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति.............

Brijendra Singh... (बिरजू, برجو) said...

saarthak rachna..badhai

दिगम्बर नासवा said...

स्वागत है आपका लंबे समय के बाद ... प्रभावी उपस्थिति दर्द की है आपने ...

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

आसपास बिखरी सच्चाई के दो रूप ...

Manoj K said...

बहुत कुछ बदल रहा और बहुत कुछ नहीं भी !

कविता रावत said...

sach baaten to bahut kahi jaati hain lekin vote batorne ke baad sab apne mein kho jaate hai..aas-paas ka dikhte hi nahi ki kya hora hai..

samajik bidambana ka chintansheel yartharth chitran prastuti hetu aabhar!

आशा जोगळेकर said...

लंबे समय बाद आईं है वापस पर लेखनी की धार कायम है । स्वागत है ।