Monday, April 13, 2009

अपनी बात

स्वामी विवेकानंदजी ने कहा है "वाद विवाद या लडाई झगडे से कभी अच्छा फल नही हो सकता |लोगो से यह भी कहने की आवश्यकता नही की तुम लोग जो कुछ कर रहे हो ,वह अच्छा नही है ,बुरा है |जो कुछ अच्छा है उसे उसके सामने रख दो ,फ़िर देखो वे कितने आग्रह के साथ उसे ग्रहण करते है |और फ़िर देखोगे की मनुष्य मात्र में जो अविनाशी ईश्वरीय शक्ति है ,वो जाग्रत हो जाती है और जो कुछ उतम है ,जो महिमामय है ,उसे ग्रहण करने के लिए हाथ फैला देती है "|
हमारे देश के हिदुवादी नेता जो अपने चुनावी प्रचार में भरसक स्वामीजी का नाम लेते है अगर उपर्युक्त उक्ति को गहरे से समझकर अपने राजनितिक जीवन का मन्त्र बना ले तो प्रधानमंत्री की कुर्सी को गरिमा प्रदान कर लोकतंत्र को शीर्ष पर पहुंचा सकते है |
एक दुसरे पर शब्दों केबाण चलाना ,एक दसरे पर बेमतलब कीचड़ उछालना इन सब बातो में समय बर्बाद कर अपना स्वयम का ही नुकसान कर रहे है और आने वाली पीढी के लिए एक अंधी खाई ही खोद रहे है |आज मिडिया इतना सशक्त मध्यमहै अपनी बात पहुचाने का तो क्यो न ठोस कार्यक्रम करके सच्ची उपलब्धिया दिखा कर एक इमानदार पहलकर लोकतंत्र का सम्मान कर अपने को भी मजबूत किया जाय |
हम भारतवासी भाग्यवान है जो हमे हमारे देश में सब कुछ कहने की छुट है अधिकार है ,हमारे पास हमारा स्वर्णिम इतिहास है ऋषियों की अम्रत वाणी है |
तो चले इस बार स्वामीजी के कथन का सच्चा अनुसरण करे |

2 टिप्पणियाँ:

परमजीत बाली said...

सुन्दर विचार प्रेषित किए हैं। काश! ऐसा हो सके।

अमिताभ श्रीवास्तव said...

shobhnaji, aaj ke haalaat badal gaye he..aaj vivekanand ko jyada log padhhte bhi honge pata nahi..
yah vakai vichitra dour he..is dour me kisiko kese samjhaayaa jaaye bhagvaan bhi nahi janta hogaa...
aaj yahi satya lagta he ki
naa baap bada naa bhaya, sabse bada rupiyaa...
par aapke pryaas jaari rakhiye..