Thursday, June 04, 2009

प्यास


अँधेरी रात का साथ है
तो उजाले की तलब है

सर्द रात का साथ है तो
धूप की तलब है

अपने साथ है
तो सपने की तलब है

सपने साथ है
तो अपनों की तलब है

रास्ते साथ है
तो मंजिल की तलब है

मंजिल है साथ
तो रास्ते की तलब है


जिन्दगी साथ है तो
मौत की तलब है

मौत की दस्तक है
तो जिन्दगी की तलब है ................................

(इमेज सोर्स - क्सेलासवर्ल्ड)

9 टिप्पणियाँ:

दिगम्बर नासवा said...

जिन्दगी अपने आप में भी तो एक तलब ही है...............किसी पागल की तलब .................. बहुत खूब लिखा है

रश्मि प्रभा... said...

और सबके साथ आपकी भावनाओं की तलब है....

शोभना चौरे said...

रश्मि प्रभाजी
नास्वाजी
भावनाए ही तो अक दुसरे से हमे जोड़ती है

बहुत बहुत धन्यवाद

Mamta said...

तलबगार बने रहो ये ही कहना चाहती हो न भाई
साहित्यिक प्यासों की बधाई
MAMTA

अमिताभ श्रीवास्तव said...

talab...../aap jaanti he..ye talab hi he jo jivan ki patvaar he,, darshan me talab ki bahut mahttaa he, ye kabhi aadat, to kabhi fitrat ke roop me saamne aati he..//fitrat me aadmi kaa poora saar he.../kher, bahut achha likh rahi he aajkal...//
saral shbdo me bahut gahri baate// ise hi kahte he kavita// mahaavir prasaad dvediji ne kahaa bhi he ki kavita vahi jo prabhaavvaadi ho// tukbandi se baat nahi banti//

परमजीत बाली said...

बहुत बढिया!!

विनय said...

आपकी कविताएँ बहुत सुन्दर हैं

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गुलाबी कोंपलें

Babli said...

आपकी टिपण्णी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया!
बहुत ही ख़ूबसूरत कविता लिखा है आपने जो काबिले तारीफ है! बेहद पसंद आया!

k.r. billore said...

aapki kalpana kabilee tariff hai,,,jo hai uski berukhi bhi eak afasana a talab hai,,jo beekhabar hai hamari talab se vo bhi nazrana a talab hai,,,kamana billora mumbai,,,,