Sunday, January 09, 2011

२८० लाख करोड़ का सवाल है .......

एक मेल आया है लगा आप सबके साथ बाँट लू |


280 लाख करोड़ का सवाल है ...
*
"भारतीय गरीब है लेकिन भारत देश कभी गरीब नहीं रहा"* ये कहना है स्विस बैंक के
डाइरेक्टर का. स्विस बैंक के डाइरेक्टर ने यह भी कहा है कि भारत का लगभग 280
लाख करोड़ रुपये (280 ,00 ,000 ,000 ,000) उनके स्विस बैंक में जमा है. ये रकम
इतनी है कि भारत का आने वाले 30 सालों का बजट बिना टैक्स के बनाया जा सकता है.
या यूँ कहें कि 60 करोड़ रोजगार के अवसर दिए जा सकते है. या यूँ भी कह सकते है
कि भारत के किसी भी गाँव से दिल्ली तक 4 लेन रोड बनाया जा सकता है. ऐसा भी कह
सकते है कि 500 से ज्यादा सामाजिक प्रोजेक्ट पूर्ण किये जा सकते है. ये रकम
इतनी ज्यादा है कि अगर हर भारतीय को 2000 रुपये हर महीने भी दिए जाये तो 60 साल
तक ख़त्म ना हो.
यानी भारत को किसी वर्ल्ड बैंक से लोन लेने कि कोई जरुरत नहीं है. जरा सोचिये
... हमारे भ्रष्ट राजनेताओं और नोकरशाहों ने कैसे देश को लूटा है और ये लूट का
सिलसिला अभी तक 2010 तक जारी है. इस सिलसिले को अब रोकना बहुत ज्यादा जरूरी हो
गया है. अंग्रेजो ने हमारे भारत पर करीब 200 सालो तक राज करके करीब 1 लाख करोड़
रुपये लूटा. मगर आजादी के केवल 64 सालों में हमारे भ्रस्टाचार ने 280 लाख करोड़
लूटा है. एक तरफ 200 साल में 1 लाख करोड़ है और दूसरी तरफ केवल 64 सालों में
280 लाख करोड़ है. यानि हर साल लगभग 4.37 लाख करोड़, या हर महीने करीब 36 हजार
करोड़ भारतीय मुद्रा स्विस बैंक में इन भ्रष्ट लोगों द्वारा जमा करवाई गई है.
भारत को किसी वर्ल्ड बैंक के लोन की कोई दरकार नहीं है. सोचो की कितना पैसा
हमारे भ्रष्ट राजनेताओं और उच्च अधिकारीयों ने ब्लाक करके रखा हुआ है.
हमे भ्रस्ट राजनेताओं और भ्रष्ट अधिकारीयों के खिलाफ जाने का पूर्ण अधिकार है.
हाल ही में हुवे घोटालों का आप सभी को पता ही है - CWG घोटाला, २ जी
स्पेक्ट्रुम घोटाला , आदर्श होउसिंग घोटाला ... और ना जाने कौन कौन से घोटाले
अभी उजागर होने वाले है ........
आप लोग जोक्स फॉरवर्ड करते ही हो. इसे भी इतना फॉरवर्ड करो की पूरा भारत इसे
पढ़े ... और एक आन्दोलन बन जाये ...
सदियो की ठण्डी बुझी राख सुगबुगा उठी,
मिट्टी सोने का ताज् पहन इठलाती है।
दो राह, समय के रथ का घर्घर नाद सुनो,
सिहासन खाली करो की जनता आती है।
जनता? हां, मिट्टी की अबोध् मूर्ते वही,
जाडे पाले की कसक सदा सहने वाली,
जब् अन्ग अन्ग मे लगे सांप हो चूस् रहे,
--
"Girte hain sheh-sawar hi maidan-e-jung mein Woh tifl kya gire jo ghutnon ke bal chale" !!!

17 टिप्पणियाँ:

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey said...

यह मेल और एसएमएस बहुत चल रहा है। सत्यता का पता नहीं।
यह जरूर है कि पहले अंग्रेजों ने भारत को लूटा का विश्वास करने वाले बहुत थे। अब नेता/नौकरशाहों ने भारत लूटा को आसानी से मानने वाले बहुत हैं।

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

शोभना जी!आप इन मेल/एसएमएस को सर्क्यूलेट करने की बात कर रही हैं... आप लगतार ब्लॉग पर इन बातों की सच्चाई लिखना शुरू करें तो लोग झँक झाँक कर चले जाएँगे...
यहाँ मुन्नियों/शीलाओं पर वाह वाह और थू थू करने वाले बहुत हैं, मगर आपने जो चर्चा छेड़ी है उसपर आचार सन्हिता के नाम पर चुप बैठने वाले उससे भी ज़्यादा हैं.
जब राष्ट्रमण्डल खेलों में घोटाले की बातें हमने की थीं तब कई लोगों को यह भारत का विश्व स्तर का आयोजन लग रहा था, अब जब बात ख्लकर सामने आ गई है तो वही लोग ख़ामोश बैठे हैं...

देवेन्द्र पाण्डेय said...

मेल भेजने वाले का नाम-पता भी लिख देतीं तो अच्छा होता।

nilesh mathur said...

वाकई चिंताजनक है !

shikha varshney said...

उपरोक्त जानकारी तो मिलती रहती है पर आपकी कविता की पंक्तियों में बहुत जान है.

प्रवीण पाण्डेय said...

शर्म है उन पर जिनके पैसे जमा है वहाँ पर।

राज भाटिय़ा said...

यह मेल सचाई ही बता रहा हे, ओर यह सच भी हे, आप ने बहुत अच्छा किया इसे यहां प्रकाशित किया, आज भी देखो सभी नेता ईमान दारी का चोगा पहन कर देश को लूट रहे हे, ओर ऊपर से बेशर्मो की तरह दांत दिखा रहे हे, अज तक जनता जगरुक नही होती यह लूट ऎसे ही चलेगी. धन्यवाद

मनोज कुमार said...

शर्मनाक हालात।

संजय भास्कर said...

बहुत खूब, लाजबाब !
आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ, क्षमा चाहूँगा,

अनामिका की सदायें ...... said...

ji han pahle bhi main aisi post padh chuki hun aur kayi jagah forward bhi ki aur bataya bhi iske bare me...is swiss bank ki jama punji se 15 saal tak ham apne desh ki aabadi ko muft shiksha de sakte hain.

janta ko jagruk hokar in sab bhrashtachariyon ki khabar leni chaahiye.

अल्पना वर्मा said...

आँखें खोल देने वाली खबर है.
जिस तरह आये दिन एक से एक नए और बड़े घोटालों की खबरें आ रही हैं उससे लगता है यह इमेल सच कह रहा है .

shekhar suman said...

हालत बहुत चिंताजनक है....

ajit gupta said...

यह मेल पूर्व में पढा जा चुका है। अब तो नया भी आ गया है कि सोनिया गांधी का कितना पैसा जमा है स्विस बैंक में। यह तो समाचार पत्रों ने भी दिया है।

anshumala said...

इसमे कोई दो राय नहीं है की देश को लुटा गया है और आज अपनों द्वारा लुटा भी जा रहा है किन्तु जहा तक सवाल इन आकड़ो का है तो ये बिल्कुल सच हो जरुरी नहीं है | नेट पर तो कई जगह ये भी लिखा मिल जायेगा की नशा में ७० प्रतिशत वैज्ञानिक भारतीय है और एक बार तो अधिकारियो ने यही दाता उठा कर मंत्री जी को डे दिया और मंत्री जी ने उसे संसद में बोल भी दिया जब मीडिया ने बताया की ये गलत आकडा है तब मंत्री जी को माफ़ी मंगनी पड़ी यहाँ तक की नासा को भी कहना पड़ा की भारतीय मूल के वैज्ञानिको की संख्या तो केवल दशमलव से नीचे है |

अमिताभ श्रीवास्तव said...

जी हां, भारत सोने की चिडिया था, है और रहेगा..। फर्क यह है कि इस चिडिया के पंख कुतरे जाने लगे हैं, उसका गोश खाया जाने लगा है..। किंतु यह इस धरा की महिम है कि उपजाऊ मिट्टी से सबकी लाज रखे हुए है

दिगम्बर नासवा said...

SMS to bahut aate hain is baat ke ... idhar se udhar bhi jaa rahe hain .. par chetna ban kar kab aandolan banega pata nahi ...

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

मेरे पास भी आया था मेल।

मैं इस तरह के मेल नहीं पढता।

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