नही मांगते धन और दौलत
न चांदी न सोना
हम तो मांगे माँ तेरे मन में
एक छोटे सा कोना .........
देवी माँ सबकी आशाये पूरी करे
नव रात्रि के भव्य आयोजनों माँ कही खो गई है |
आज मुझे इस अवसर पर माँ की याद आरही है उन
भव्य बजारों की चकाचौंध देखकर मन बरबस ही कह उठता है -
माँ ne कभी अपने जीवन में
छाते का उपयोग नही किया
क्योकि
उसने बारिश मे
कभी घर के बाहर कदम नही रखा
माँ ने कभी चप्पल नही खरीदी
क्योकि
दादी कि पुरानी चप्पल
फेक नही सकते थे
माँ ने कभी
ताजी रोटी नही खाई
क्योकि
घर में नौकर
नही थे
माँ ने कभी
नई साडी नही पहनी
क्योकि
बुआओ को
हर तीज त्योहारों पर
शगुन भेजना जरुरी होता था|
माँ कभी भी
पलंग पर नही सोई
क्योकि
पलंग सिर्फ
दादा बाबूजी और चाचाजी
के लिए था
माँ ने कभी
बाजार नही देखा
क्योकि उसकी
कभी कोई जरुरत
ही नही होती थी |
नवरात्रि के शुभ अवसर पर मै अपने सभी ब्लागर भाई बहनो का ह्रदय से आभार मानती हूँ जिन्होने हमेशा अविलम्ब मेरी अभिव्यक्ति पर अपनी महत्वपूर्ण टिप्पणिया देकर मेरा होंसला बढ़ाया |
इतनी बड़ी दुनिया मे हमारे सभी के विचारो का ये परिवार खूब फले फूले इन्ही शुभकामनाओ के साथ माँ के आराधना के पर्व की अनेक बधाई |



